मुस्कुराते पल-कुछ सच कुछ सपने

चंद लम्हें थे मिले,भींगी सुनहरी धूप में, हमने सोचा हँस के जी लें,जिन्दगानी फिर कहाँ

Saturday, June 27, 2009

ये बोरवेल का ढक्कन बंद क्यों नही होता.

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अभी पिछले सप्ताह समाचार पत्र मे पढ़ा की राजस्थान के एक गाँव मे अंजू नामक एक लड़की को 19 घंटों की मेहनत के बाद बोरवेल से निकाला गया. यह पहली ...
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Saturday, June 13, 2009

पिता,भगवान को धरा पर लाने का सार्थक प्रयास है.

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पिछले महीने माँ की महिमा की सच्चाई बयान किया तो लोगो ने बहुत पसंद किया अगर और कोई है जो माँ के नेह बराबरी करता है तो वो है एक पिता का प्यार....
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Saturday, June 6, 2009

हिन्दी सिनेमा मे नाम का अकाल पड़ गया है.

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आज कल सिनेमा के अजीब अजीब नाम आ रहे है,उन्ही बातों से आपको हँसाने का प्रयास कर रहा हूँ, उम्मीद करता हूँ कि आप सब को पसंद आएगा. हिन्दी फिल्म...
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Saturday, May 30, 2009

पानी वर्सेज शराब- दास्तान उस शॅक्स की दुनिया जिसे शराबी कहती हैं

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एक शराबी की दास्तान,दिन भर शराब मे डूबा रहने वाला वो शॅक्स ऐसी सोच रखता है की देश और उसके विकास की बात करने वाले बड़े बड़े लोगों की ज़ुबाँ ...
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परिचय

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विनोद कुमार पांडेय
बनारस->नोएडा, उत्तर प्रदेश, India
अभी तक कुछ खास नही, थोड़े शब्द,थोड़ी भावनाएँ और मुट्ठी भर अपने परिकल्पनाओ का सागर लेकर आप लोगो के सामने आया हुँ, अगर हम आपके तनिक भी काम आ सके तो समझूंगा की इंसान बनने की शुरुआत हो गयी. इस भीड़ भरी जिंदगी मे अगर हमारे चन्द बोल आपके मुस्कुराहट बन सके और कभी मानवीय भावनाओं का अहसास दिला पाए तो खुद को कुछ क़ाबिल मानूँगा .यही मकसद और एक उम्मीद की दीया लेकर चल पड़ा हुँ .मुझे नही पता की हमे कितनी कामयाबी मिलेगी अपने इस अभियान मे फिर भी एक ज़िद के साथ आपलोगो के सहयोग की अपेक्षा करता हुआ आगे बढ़ता रहूँगा ताकि कबीर की जन्मभूमि और तुलसी के कर्मभूमि मे जन्म लेना मेरा सार्थक सिद्ध हो जाए.
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