मुस्कुराते पल-कुछ सच कुछ सपने

चंद लम्हें थे मिले,भींगी सुनहरी धूप में, हमने सोचा हँस के जी लें,जिन्दगानी फिर कहाँ

Friday, July 24, 2009

मंदी..अभी और कितने दिन

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विश्व अर्थव्यवस्था पिछले डेढ़ सालों से जूझ रही है..सबके जेहन मे यहीं प्रश्न है आख़िर कब तक यही हाल रहेगा.. अभी और कितने घर को बर्बाद करेगी य...
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Sunday, July 19, 2009

रात से मेरा रिश्ता पुराना हुआ, चाँद के घर मेरा आना जाना हुआ|

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रात से मेरा रिश्ता पुराना हुआ , चाँद के घर मेरा आना जाना हुआ | यह न पूछो हुआ , कब व कैसे कहाँ , धड़कनों की गुज़ारिश थी , मैं चल...
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Saturday, July 11, 2009

दीदी की दरियादिली-भारतीय रेल बज़ट

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आज आपके सामने भारत का रेल बज़ट लेकर आया हूँ , क्षमा चाहता हूँ , थोड़ी देर से आया पर जैसा आपको पता ही है , भारतीय रेल बज़ट है तो भारतीय ट्रे...
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Sunday, July 5, 2009

इंसान की खोज

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आज के परिवेश मे एक अदद इंसान की खोज, बंद दीवारों मे खुला आसमान ढूढ़ने चला था, मायूस लौट आया मैं,इंसान ढूढ़ने चला था. दुनियाँ जहाँ देखने में ...
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Saturday, June 27, 2009

ये बोरवेल का ढक्कन बंद क्यों नही होता.

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अभी पिछले सप्ताह समाचार पत्र मे पढ़ा की राजस्थान के एक गाँव मे अंजू नामक एक लड़की को 19 घंटों की मेहनत के बाद बोरवेल से निकाला गया. यह पहली ...
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परिचय

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विनोद कुमार पांडेय
बनारस->नोएडा, उत्तर प्रदेश, India
अभी तक कुछ खास नही, थोड़े शब्द,थोड़ी भावनाएँ और मुट्ठी भर अपने परिकल्पनाओ का सागर लेकर आप लोगो के सामने आया हुँ, अगर हम आपके तनिक भी काम आ सके तो समझूंगा की इंसान बनने की शुरुआत हो गयी. इस भीड़ भरी जिंदगी मे अगर हमारे चन्द बोल आपके मुस्कुराहट बन सके और कभी मानवीय भावनाओं का अहसास दिला पाए तो खुद को कुछ क़ाबिल मानूँगा .यही मकसद और एक उम्मीद की दीया लेकर चल पड़ा हुँ .मुझे नही पता की हमे कितनी कामयाबी मिलेगी अपने इस अभियान मे फिर भी एक ज़िद के साथ आपलोगो के सहयोग की अपेक्षा करता हुआ आगे बढ़ता रहूँगा ताकि कबीर की जन्मभूमि और तुलसी के कर्मभूमि मे जन्म लेना मेरा सार्थक सिद्ध हो जाए.
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