Tuesday, May 21, 2013

उन्हें आसमान चाहिए,जिन्हें ऊँचाइयों से डर है..(विनोद कुमार पाण्डेय )

आज सिर्फ कुछ मुक्तक प्रस्तुत करता हूँ । 

1) मुझे इस बात की बिलकुल नहीं फिकर 
 है मेरे दोस्तों की आजकल टेढ़ी नजर
 मैं तो हैरान हूँ यह सोचकर तब से 
 कि वो नाराज है इंसानियत की बात पर 


2) उन्हें आसमान चाहिए, जिन्हें ऊँचाइयों से डर है 
खुद में है गुम वो, जिस शख्स पे सबकी नजर है 
अब आदमी भी किसी तिलिस्म से कम नहीं यारों 
उसे खुद की खबर नहीं है,जिसे सबकी खबर है

3) ख्यालों में डूबी फ़िज़ा चाहता हूँ,
मैं अपना अलग आसमाँ चाहता हूँ |
दुखे दिल किसी का जो मुझसे कभी,
उसी पल मैं उसकी सज़ा चाहता हूँ |

4) गण सारे गड़बड़ हुए,हुआ प्रदूषित तंत्र,
भ्रष्टाचार बन गया सबका,धन उपजाऊँ मंत्र|
तीन गुना भुखमरी बढ़ गई,बढ़ी ग़रीबी पाँच,
ये तो रही तरक्की अपनी,जब से हुए स्वतंत्र||

5) अंधों को माँ नई रोशनी, गूँगो को संवाद दीजिए, 
मूर्खों के दिमाग़ में थोड़ी, बुद्धि-वर्धक खाद दीजिए, 
नही चाहिए और हमें कुछ, एक अर्ज़ है माँ तुमसे, 
रहे ठसाठस पर्स हमेशा, ऐसा आशीर्वाद दीजिए

Sunday, December 23, 2012

तू आतंकी टाप गुरु----(विनोद कुमार पाण्डेय )

पिछले कुछ दिनों से एक आतंकवादी का नाम बहुत सुर्ख़ियों में है। मैंने भी अपनी प्रतिक्रिया स्वरूप कुछ लाइनें अपने अंदाज में लिखी है। देखिएगा, आपके प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा। 


तू आतंकी टाप गुरु 
तो हम तेरे बाप गुरु 

भारत के दिल पर हमला कर
की है तूने पाप गुरु 


आदम के स्वरूप में निकला  
तू विषधारी  साँप गुरु 


तेरी सजा देख आतंकी
भी  जायेंगे काँप गुरु 


मृत्युदंड निश्चित है तेरी
मौत से दुरी नाप गुरु


जितने दिन लिखा है जी ले
बक ले अनाप सनाप गुरु 


जप ले रब दा नाम गुरु
कर ले पश्चाताप गुरु 


हिन्दुस्तानी  मेहमानी में
माल मुफ्त का चांप गुरु 

Tuesday, December 11, 2012

दर्द ही जब दवा बन गई ---(विनोद कुमार पाण्डेय )

मित्रों,हास्य-व्यंग्य से थोडा हटकर एक ग़ज़ल पेश कर रहा हूँ । अच्छा लगे तो  आशीर्वाद  दीजियेगा।|

दर्द ही जब दवा  बन गई 
मुस्कराहट अदा बन गई 

राह इतनी भी आसाँ न थी 
जिद मगर हौसला बन गई

सीख माँ ने  जो दी थी मुझे
उम्र भर की सदा बन गई 

संग दुआ जो पिता की रही 
बद्दुआ भी  दुआ बन गई 

पाप कहते थे जिसको  कभी 
छल-कपट  अब  कला बन गई  

झूठ वालों की इस भीड़ में 
बोलना  सच बला  बन गई  

चाँद से चाँदनी क्या मिली 
रात वो पूर्णिमा बन गई  

चूमना है गगन एक दिन 
ख्वाब अब प्रेरणा बन गई

Saturday, August 25, 2012

प्रेम के गीत की गूँज है हर तरफ ---(विनोद कुमार पांडेय)

बहुत दिनों के बाद प्रेम जैसे विषय पर एक ग़ज़ल लिखने की कोशिश की| जो कुछ दिनों पहले आदरणीय पंकज जी द्वारा आयोजित तरही मुशायरे में सम्मिलित की गई थी|आज मन हो रहा था कि आप सब को भी यह ग़ज़ल पढ़वाते है| उम्मीद है आप सब को भी अच्छी लगेगी| 

इक लहर सी हृदय में उठी है प्रिये
क्या कहूँ किस कदर बेखुदी है प्रिये

नैन बेचैन है,हसरतें हैं जवाँ
हर दबी भावना अब जगी है प्रिये

प्रेम के गीत की गूँज है हर तरफ
प्रीत की अल्पना भी सजी है प्रिये

साज़ श्रृंगार फीके तेरे सामने
दिल चुराती तेरी सादगी है प्रिये

मेरे दिल का पता दिल तेरा हो गया
ये ठगी है कि ये दिल्लगी है प्रिये

उस हवा से है चंदन की आती महक
जो हवा तुमको छूकर चली है प्रिये

उस कहानी की तुम ख़ास किरदार हो
संग तुम्हारे जो मैने बुनी है प्रिये

छन्द,मुक्तक,ग़ज़ल,गीत सब हो तुम्हीं
तुम नही तो कहाँ,शायरी है प्रिये

Thursday, June 28, 2012

इसकी टोपी उसके सर---(विनोद कुमार पांडेय)

एक लंबी खामोशी के बाद ब्लॉग पर आज के कॉरपोरेट सेक्टर के एक सबसे कारगर हथियार चमचागिरी पर एक हास्य-व्यंग रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ|


 इसकी टोपी उसके सर,है युग का खास हुनर,
 बन जाओगे खास बॉस के,लगे रहो बस इधर उधर |

 चमचागिरी के प्रथम पाठ से ही यह बात हुई पक्की 
 चापलूसी गर सीख गये तो होगी खूब तरक्की 
 जो साहब को हो पसंद,बस करना केवल काम वहीं
 उसकी खूब बुराई हाँको,जो साहब को जँचे नही


झूठ बोलकर करो प्रशंसा कह दो तुम महान हो सर |
बन जाओगे खास बॉस के,लगे रहो बस इधर उधर ||


कभी न काटो बात बॉस की जो कह दे वो वही सही,
कहे आम को वो ईमली तो तुम भी बोलो ईमली जी
थोड़ा करो दिखाओ ज़्यादा,मूलमंत्र है यह रट लो
जहाँ काम ज़्यादा करना हो किसी बहाने से हट लो


फँसने के हालात दिखे तो हो जाना तुम छूमंतर |
बन जाओगे खास बॉस के,लगे रहो बस इधर उधर ||


तुच्चा सा भी काम करो तो हल्ला खूब मचाना तुम
ऑफीस में हर एक कानों तक यह चर्चा पहुँचाना तुम
बहुत कठिन था काम मगर तुमने इसको अंजाम दिया
सर जी के निर्देशन में तुमने मेहनत से काम किया


सीखो इसको अमल करो इससे ही बढ़ता है नंबर |
बन जाओगे खास बॉस के,लगे रहो बस इधर उधर ||


बॉस से पहले आना रोज,बॉस के बाद ही जाना रोज
राजनीति पूरे ऑफीस की सर जी को समझाना रोज
और तनिक घुलमिल सकते हो अगर करो अच्छी आगाज़
एक मीटिंग ठेके पर रखो अगर बॉस हो दारूबाज


और मित्रता बढ़ेगी जब दोनो बैठेंगे पी-पी कर |
बन जाओगे खास बॉस के,लगे रहो बस इधर उधर ||