Tuesday, September 1, 2015

क्या जमाना आ गया

क्या जमाना आ गया smile emoticon
बिल्लियों को श्वान राजा भा गए
और बगुले मोतियां सब खा गए
हों गए हैं उस्तरे सस्ते बहुत 
बंदरों के मौज के दिन आ गए
--------------------विनोद पाण्डेय

Thursday, March 12, 2015

मैं रंग मुहब्बत का,थोड़ा सा लगा दूं तो ----(विनोद कुमार पाण्डेय )

पंकज सुबीर जी द्वारा आयोजित होली की तरही मुशायरा में मेरी ग़ज़ल । पसंद आये तो अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराइयेगा | धन्यवाद | 

मुस्कान तेरे लव पे अपनी  मैं सजा दूं तो 
सब दर्द तेरे पी  लूं  अश्कों को सुखा दूं तो  

इकरार किया तुमने हंगामा हुआ बरपा 
अब अपने भी मैं दिल का गर हाल बता दूं तो 

पिचकारी लिए रंगो की निकलें हैं सब देवर 
भाभी  का कहाँ  है घर मै राह दिखा दूं तो

ससुराल गया नन्दू बीवी को लगाने रंग  
गवना है  अभी बाकी मै शोर मचा दूं तो  

चुपके से रघु धनिया के हाते में कूदा  है 
धनिया के पिताजी को ऐसे में जगा दूं तो  

भुक्खड़ की तरह  खाते पंडित जी  हैं गुझिया को 
गुझिया में अगर उनकी कुछ भांग मिला दूं तो 

सम्बन्ध नही बनते बुनियाद पे रुपयों की  
बस्ती में  गरीबों की गर प्यार दिखा दूं तो 

है रंग बहुत सारे तुम डूबी हो जिनमें पर 
मैं रंग मुहब्बत का,थोड़ा सा लगा दूं तो 

माना कि ग़ज़लकारों के बीच अनाड़ी हूँ 
शे 'रों  से मगर अपने  रोते को हँसा दूं तो 

Saturday, January 24, 2015

मोगरे के फूल पर थी चाँदनी सोई हुई-----(विनोद कुमार पाण्डेय )

पंकज सुबीर जी द्वारा आयोजित नए साल की तरही मुशायरे में शामिल की गई ग़ज़ल जिसे सभी शायरों ने सराहा ,अब आप ब्लॉग के मित्रों के लिए हाजिर है । धन्यवाद !

बिन किसी के लग रही थी हर ख़ुशी सोई हुई 
वो मिला तो जग गयी यह जिंदगी सोई हुई 

इक अदब के साथ भँवरे बाग़ में दाखिल हुए 
लग रहा है आज उनकी है कली सोई हुई 

धूल,बारिश,नाव,किस्से,काठ घोड़ा अब कहाँ 
आजकल तो बालकों की है हँसी सोई हुई 

है ख़ुशी नववर्ष की पर मन हमारा कह रहा  
मत पटाखे तू बजा है लाडली सोई हुई 

बेचता था स्वप्न वो,सौदा किया फिर चल दिया 
ख्वाब में डूबी रही वो बावली सोई हुई 

पेड़ सारे कट गए हैं गाँव विकसित हो गया  
बन गयी सड़कें नदी में है नदी सोई हुई 

मनचले कुछ भेड़ियों का बढ़ रहा है हौसला 
कब तलक आखिर रहेगी शेरनी सोई हुई 

चौधियायी चाँद की आँखें जमीं पर देख यह  
मोगरे के फूल पर थी चाँदनी सोई हुई 

हर दफा इक जनवरी को सब यहीं है सोचते 
इस दफा किस्मत जगेगी है अभी सोई हुई 

Monday, January 19, 2015

एक हैं कृष्णा तीरथ -----(विनोद कुमार पाण्डेय )

कांग्रेस की 10 साल तक सांसद रहीं कृष्णा तीरथ ने बीजेपी  में शामिल होते ही कहा कि - भारत को कांग्रेस मुक्त देश बनाना है :)
   
(नवभारत टाइम्स )



अब इसे सत्ता का लोभ कहें या डूबते नाव से कूद कर बचने की प्रक्रिया । कुछ भी हो वफ़ादारी तो बिलकुल नही

कहा जा सकता है । अब धीरे-धीरे बहुत से राजनेता जो विरोध में थे,आज समर्थन में आ रहे हैं,,शायद 

पहले भी उनके मन में कुछ और ही था जो आज सामने आ रहा है । 


छुपाया खूब जी-जान से उसने 

हकीकत सामने आ ही गई पर 


 (विनोद पाण्डेय )




अब तो जो हो रहा है ,हमें देखते रहना है क्योंकि हम तो देश की जनता है । हमें अच्छा देश चाहिए ,देखते हैं 

कैसे-कैसे सब संभव होगा । 

Saturday, January 3, 2015

चुलबुल पांडे-----(विनोद कुमार पाण्डेय)

अभी कुछ दिन पहले की समाचार है, एक पार्टी के दौरान एक दरोगा जी आर्केस्ट्रा कलाकारों के साथ नाचते हुए धरे गए । किसी रिपोर्टर ने फोटो खींच कर अपना नंबर बना लिया और दरोगा जी काम से गए :)
अब भाई साहब की समझ में आ गया होगा कि सरे आम सड़क पर राजनेताओं की इज़्ज़त उतारना,अपराधियों की हड्डी पसली एक करना और भीड़ में नचनियों के साथ कमर मटकाने का कॉपीराइट सिर्फ चुलबुल पांडे और बाजीराव सिंघम के पास है