Wednesday, November 23, 2016

एक बॉल में कई विकेट लिए मोदी जी-----(विनोद कुमार पांडेय)

कालाधन कालाधन कालाधन बोल-बोल 
गोरे-काले सबको लपेट लिए मोदी जी, 

सारे देशवासियों की करवा दिए परेड 
लाइन में खड़े भूखे पेट लिए मोदी जी ,

राहुल व केजरी जी हल्ला मचा रहें हैं  
सारा माल अपना समेट लिए मोदी जी ,

ममता व मायावती सदमें में आ गयी हैं 
एक बॉल में कई विकेट लिए मोदी जी 


--विनोद पांडेय 

Saturday, October 29, 2016

किस्मत हो तो अमर सिंह के जैसी हो भगवान----(विनोद कुमार पांडेय )

किस्मत हो तो अमर सिंह के जैसी हो भगवान,
चुप रह कर भी बड़े-बड़ों के काट रहे हैं कान |

पहले बाहर गए सपा से फिर अंदर आये
जाने कैसी लालच देकर सबको भरमाये 
जिसने पहले धक्का देकर फेंका था बाहर
आज वहीं रटता रहता है हरदम अमर अमर
सटे मुलायम से जबसे ये ,भागा आजम खान । चुप रह कर भी........

इनके कारण दुश्मन हो गए चच्चा और भतीजा
बैठक कई हुई लेकिन कुछ निकला नहीं नतीजा
भाई-भाई दुश्मन हो गए मजा ले रहें रोग
सब चिंता में हैं लेकिन ये रहें खूब सुख भोग
जयाप्रदा भी इनके खातिर सहती हैं अपमान । चुप रह कर भी........

इनके किस्से बहुत सुने हैं है इतिहास पुराना
हंगामा है मचा, जहाँ है इनका आना जाना
घर में घुसते ही ये चालू खुराफात करते हैं
बच्चन जी हो या अम्बानी इनसे सब डरते हैं
कैसे हुए मुलायम के प्रिय,पब्लिक है हैरान | चुप रह कर भी........

हैं अखिलेश बहुत गुस्सा पर जब हथियार चलाएंगे
इनके हुनर के आगे सारे वार ध्वस्त हो जायेंगे
अभी और लड़वाएंगे शायद ये कसम उठायें हैं
हमको तो लगता है कोई बदला लेने आये हैं
सपा डुबाकर ही आएगी जान में इनके जान । चुप रह कर भी........

किस्मत हो तो अमर सिंह के जैसी हो भगवान,
चुप रह कर भी बड़े-बड़ों के काट रहे हैं कान |

(हास्य कवि विनोद पांडेय )

Thursday, October 20, 2016

बाबू जी सेवानिवृत्त हो गये हैं----(विनोद कुमार पांडेय )

बाबू जी सेवानिवृत्त हो गये हैं 
 
 
हाथों में सब्जी का थैला,
अंतर्मन में सवालों का झमेला,
उलझते, रीझते,खीझते,
और कभी मुस्‍काते ,
गोलमटोल आँखों में,
एक उम्मीद लिए,
कभी इस कभी उस दुकान जाते,
इधर-उधर,भागते,मोल भाव करते,
बहू -बेटे की कमाई के चार पैसे,
बचाने की जद्दोजहद में कितनी तल्लीनता से लिप्त हो गये हैं,
और बेटा-बहू कहते हैं कि बाबू जी सेवानिवृत्त हो गये हैं.

 कड़कड़ाती ठंड में,
भोर तक काँप उठती है,
ओस की बूंदें,
बर्फ -सी लगती हैं,
नींद खुद उनींदी सी होती है,
ख्वाब एक छोटे अंतराल के लिए,
ठहर जाता है,
उस वक्त बाबू जी दूध और अख़बार,
की साज संभाल में लगे होते हैं,
घने कुहरे और ठंडी हवाओं के बीच,
सब कर्तव्य पिता के, सदैव बखूबी निभाते रहे,
अनगिनत खुशियों से हर पल जिनका सँवारते रहे,
आज वही भावनाओं से रिक्त हो गये हैं,
और बेटा-बहू कहते हैं कि बाबू जी सेवानिवृत्त हो गये हैं.

चाय के हल्‍के हल्‍के घूँट,
और एक सुखद अध्याय का आरंभ,
रोज पोते को स्कूल छोड़ना,
एक हसीन पल,
तेज कदमों के साथ,
बहकते हुए चलना,मचलना,
वृद्धावस्था का चंचल,
बचपन में बदलना,
दादा जी- दादा जी जैसे,
मोहक शब्द
तोतली आवाज़ और मुस्कान
के साथ कानों में घुलना,
स्‍नेह का सच्चा दर्शन लगते हैं,
अन्यथा प्रेम,श्रद्धा,आदर अब सब विलुप्त हो गये हैं,
और बेटा-बहू कहते हैं कि बाबू जी सेवानिवृत्त हो गये हैं.

वर्तमान की वीरनियों में,
अतीत की झनकार तो होती है,
पर अब उतनी नहीं गुदगुदाती,
बस याद भर कौंध जाती है,
जीवन के इस मोड़ पर आ गये,
जहाँ आवश्यकता निरकर्थता की ओर अग्रसर है,
उम्र समय के असर से बेखबर है
सब कुछ स्थिर है
परंतु आज भी,
यह मन जीवन के अंतिम पल तक यहीं,
अपनों के बीच में ही रहने ज़िद पाले बैठा है
यद्यपि समस्त इच्छाओं से मन तृप्त हो गये हैं,
और सब कहते हैं कि बाबू जी सेवानिवृत्त हो गये हैं .

(विनोद कुमार पांडेय )

#विश्व हिंदी सचिवालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रिय हिंदी कविता प्रतियोगिता-2013  में भारत भौगोलिक जोन के अन्तर्गत प्रथम स्थान प्राप्त/पुरस्कृत कविता .

Wednesday, October 5, 2016

स्वच्छता अभियान----विनोद कुमार पांडेय

दीनापुर गाँव का जूनियर हाईस्कूल आज रोज से कुछ अधिक चमक रहा है । स्वच्छ-भारत अभियान का असर यहाँ भी दिख रहा है । स्कूल के मास्टर और बालक-बालिकाएँ भी साफ-सुथरे कपड़ों में नजर आ रहे हैं । शम्भुनाथ चपरासी सफाई के साथ-साथ प्रधानाचार्य को गाली देने में व्यस्त है कि यदि सफाई रोज होती तो आज इतनी मारामारी नहीं करनी होती  । उधर प्रधानाचार्य तिवारी जी के चेहरे पर खिंची चिंता की लकीरें  देखकर साफ़ अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज स्कूल में कोई बड़ा अधिकारी आने वाला है।

दोपहर के बारह बजे थे । जिला विद्यालय निरीक्षक जी कार से उतरे और धड़धड़ाते हुए प्रधानाचार्य कक्ष में प्रवेश किये । प्रधानाचार्य जी,शम्भुनाथ को सफाई के लिए निर्देश पर निर्देश दिए जा रहे हैं । शायद यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि स्कूल में सफाई अभियान को लेकर वो कितने सक्रिय हो चुके हैं ।
बड़े साहब को देखते ही तिवारी जी सम्बोधन के लिए उठे पर जैसे ही बोलना शुरू किये कि पान की पीक मुँह से बाहर निकलकर कुर्ते को छूती हुई जमीन पर आ गिरी ।
बड़े साहब मुस्कुराते हुए बोले,तिवारी जी सफाई अभियान में आपका योगदान तो सराहनीय है पर एक काम और कीजिये, एक पीकदान अपने साथ में रखिये ताकि कमरे के कोने की सफाई पर अधिक मेहनत न करनी पड़े और आपका कुर्ता भी हमेशा चमकता रहे ।
इस बार शम्भुनाथ भी हँस पड़े । तिवारी जी खिसियाते हुए इधर-उधर देखने लगे ।