Monday, March 2, 2009

वो बीते दिन बचपन के


आइए हम इस ब्लॉग की शुरुआत करते है अपने सबसे अच्छे कविता से जो आज कल के परिवेश मे जी रहे एक युवा के मन की दास्तान है,आशा है आप सब को भी मेरी यह कविता पसंद आएगी हम अपने पीछे क्या छोड़ कर आए है कितनी बातें और कितनी सरल और सहज जिंदगी जी आप सही समझ रहे है वो है हमारा बचपन और आज हम उसी बीते पल को याद करते है.

संवरता रहा मैं निखरता रहा मैं, समय चक्र के संग चलता रहा मैं,
मगर जब कभी बीते पल की निहारा,सहमने लगा मैं मचलता रहा मैं,  

सहारा जो कल थे कहाँ अब गये वो ,ये उलझन बड़ी थी सुलझती नही,  
हर एक पल संवारे कहाँ,खो गये वो ये कहता रहा खुद से सुनता रहा मैं,  

वो दादी के किस्से वो बाबा की बातें,पुराने हुए पर रही बात बाकी, 
हर एक पल वो दो पल वो जीतने भी पल थे,गुजरते गये पल रही याद बाकी,  

उन्ही चन्द लम्हों को फिर से पिरोया तो दिल के झरोखे से आवाज़ आई,  
अंधुरी कहानी के वो लफ़्ज अंतिम, बढ़ाते ही रहना सुनो मेरे भाई,  

ये मीठी सी चुभती जो दस्तक हुई ,किया गौर देखा मेरे यार थे,  
वो कहते थे ऐ दोस्त पूरा करो, जो बचपन मे हमने कहानी बनाई,  

अचानक तभी दिल के दो तार झूमे ,लगा जैसे दादी की आवाज़ आई,  
अरे मेरे बच्चे ये क्या करा रहा तू,अभी तक भी तूने ना वो लक्ष्य पाई,  

संभल कर भी चलना नही तुझको आया ,कदम से कदम को मिला कर चलो,  
करो याद चलना संभल कर के बेटा, जो उंगली पकड़ कर के हमने सिखाई,  

ये शिकवे थे उनके जो साहस लगे,मगर मैं बहुत दूर तक आ चुका था, 
वो बचपन की बातें नयी फिर हुई ,जवानी के दहलीज़ पर जब रुका था,  

जो रुक कर चला तो लगा मुझको ऐसे ,यही सब सहारा हमारे लिए, 
वो यारों के सपनो से है राह जाता,बने जो किनारा हमारे लिए,  

करूँ ख्वाब को सच जो हमने था देखा ,वो मुश्किल भी चाहे हो जितना बड़ा,  
वो बचपन के सपने भी होते है सच ,जो हिम्मत से करने को खुद से अड़ा,  

कहानी कहानी मे मंज़िल मिली थी,हक़ीक़त मे भी उसको पा कर रहूँगा , 
दुआओं से यारों के मुश्किल हटेगी,मैं सपना हक़ीक़त बना कर रहूँगा ,  
मैं सपना हक़ीक़त बना कर रहूँगा ,मैं सपना हक़ीक़त बना कर रहूँगा....

4 comments:

Samrat said...

Such souls,
Whose sudden visitations daze the world,
Vanish like lightning, but they leave behind
A voice that in the distance far away
Wakens the slumbering ages.

Vinod... I don't think I ever knew just how great u can write...... but anyways going through it has not only enlighted me but has also forced me to believe that u are really extraordinary...extramundane.....Extramural....
Cheerzzzz!!!!!

Samrat said...

Poetry lifts the veil from the hidden beauty of the world,
and makes familiar objects be as if they were not familiar.

The sense of emotions that come through is precisely why I am enjoying reading this master piece......
I truly enjoyed it.....
Keep It Up...........

Chanakkya said...

Good going Vinod. I could not read all of it but I did like the way you write. You look good in that pic. Keep it up lad. Just be confident. thats all.

Regards,
Chanakkya Agnihotre

Anonymous said...

Hello Vinod,
Gr8 words with gr8 feeling.
i only say..
you are awsome..

keep it up..