Tuesday, July 27, 2010

रिश्ते-नाते,प्यार,वफ़ा,सब कुछ फिल्मों जैसे हैं------(विनोद कुमार पांडेय)

दुनिया वाले कैसे है
ऐसे हैं ना वैसे हैं

फ़ितरत में है अव्वल नंबर,
दिखते भोले जैसे हैं

होश नही दुनियादारी का
मय में डूबे ऐसे हैं

पैसा,पैसा,पैसा,पैसा
पॉकेट में बस पैसे हैं

पूछ ना पाए बाप से बेटा
बाबू जी अब कैसे हैं

रिश्ते-नाते,प्यार,वफ़ा
सब कुछ फिल्मों जैसे हैं

संवेदना मर चुकी पूरी
जिंदा जैसे तैसे हैं,

22 comments:

हास्यफुहार said...

बेहतरीन। लाजवाब।

Udan Tashtari said...

जिन्दा जैसे तैसे हैं..बहुत सही!!

kshama said...

Wah! Sach...aulaad apne mata pitako yah baat poochhna to bhool hee gayi hai...saral bhashame wyakt sashakt rachana!!

honesty project democracy said...

बहुत ही अच्छी और उम्दा सोच से निकली कविता ,भयानक अवस्था है देश,समाज और मानव जाती की ...?

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

संवेदना मर चुकी पूरी
जिंदा जैसे तैसे हैं

सही फ़रमाया आपने ...

ana said...

bilkud sahi kahaa aapne...........sundar prastuti

girish pankaj said...

kuchh sher to behad marmik hai. badhai, iss stareey ghzal ke liye...isi tarah likhate raho. shubhkamanaen.

हरकीरत ' हीर' said...

संवेदना मर चुकी पूरी
जिंदा जैसे तैसे हैं


जी विनोद जी सच्च में फ़िल्मी सा हो गया है आज का जीवन .....

और samvednaon की to ummid ही bemani है ......!!

डॉ टी एस दराल said...

पूछ ना पाए बाप से बेटा
बाबू जी अब कैसे हैं

सच को दर्शाती रचना ।

संध्या आर्य said...

परो के धार बहुत तेज़ थे
हर एक जगह पेड कटे मिलते थे
आसमान घायल
तो जमीन प्यासी
नन्ही पंक्षियो के उडान बाकी थे

समय की धार बहुतही तेज और न जाने कितनी चीजे जैसे तैसे होने वाली है.......

महफूज़ अली said...

कविता के ज़रिये बहुत ही सही कही... लाजवाब प्रस्तुति...

सतीश सक्सेना said...

बहुत बढ़िया विनोद, बेहतरीन रचना के लिए शुभकामनायें !

Mithilesh dubey said...

bahut khub vinod bhai

Virendra Singh Chauhan said...

Badiya ji....Badiya. Mast.

स्वाति said...

रिश्ते-नाते,प्यार,वफ़ासब कुछ फिल्मों जैसे हैं
संवेदना मर चुकी पूरीजिंदा जैसे तैसे हैं...
बेहतरीन...

Babli said...

बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने! बिल्कुल सही बात का ज़िक्र किया है! उम्दा प्रस्तुती!

डॉ. हरदीप सँधू said...

विनोद जी ,
बेहतरीन रचना के लिए शुभकामनायें !

Parul said...

vinod ji sehmat hoon!prabhavi rachna!!

Vijay Kumar Sappatti said...

waah behatreen sir ji , vyangya me hi aapne bahut hi gambheer baat ko kah gaye ..

badhayi

Vijay Kumar Sappatti said...

waah behatreen sir ji , vyangya me hi aapne bahut hi gambheer baat ko kah gaye ..

badhayi

अनामिका की सदायें ...... said...

जिन्दा जैसे तैसे है...

बस यही हाल है वास्तव में.

बेहतरीन.

सुलभ § Sulabh said...

बहुत सही कहा आपने...