Friday, January 14, 2011

साल नया पर हाल पुराना----(विनोद कुमार पांडेय)

नये साल के आगमन पर पिछले सप्ताह आपने एक ग़ज़ल पढ़ी आप सब के प्यार और आशीर्वाद का आभारी हूँ आज एक हास्य-व्यंग्य .प्रस्तुत कर रहा हूँ.उम्मीद करता हूँ यह भी आप सब को पसंद आएगीधन्यवाद


नया साल आ भी गया और एक सप्ताह पुराना भी हो गया इधर कुछ दिनों में कुछ नया तो हुआ ही नही|नये साल की तैयारी में लगी जनसमूह में एक ग़ज़ब का उत्साह हर वर्ष ऐसे ही रहता है पर जैसे जैसे दिन बीतते जाते है उन्हें समझ में आने लगता है कि सारा शोर-शराबा बस महज एक दिखावा था|यह साल भी ऐसे ही जा रहा है जैसे बाकी के वर्ष गये|


ऐसी परंपरा लगभग हर वर्ष के अंत और प्रारम्भिक दौर में चलती रहती है और भोली-भाली जनता सकारात्मक ख्वाब बुनने में लगी रहती है |वैसे यह बुरी बात नही सोच तो ऐसी ही होनी चाहिए पर अब अपना देश ही ऐसा है जो पुराने मुद्दों में ही उलझा रहता है तो नया कहा से होअगर नया कुछ सुनने में भी आता है तो वो बस घोटाले बस और कुछ भी नही|


एक विश्लेषण के अनुसार गत वर्ष में बहुत बड़े बड़े घोटाले सामने आए जो खुद अपने में एक कीर्तिमान है| जिसके लिए २०१० का नाम सदा इतिहास में दर्ज हो गयाचूँकि घोटाला काफ़ी विद्वान और पढ़े लिखे लोगों द्वारा किया गया था इसलिए यह थोड़ा और ज़्यादा ही स्टैंडर्ड घोटाला माना जा रहा है|


अब अगर नया साल कुछ नया लाता है तो इन घोटाले करने वालों के लिए नया होगा जैसे कि यह बरी हो जाएँगे या कोई छोटी-मोटी सज़ा हो जाएगी|आम जनता के लिए कुछ नया होना तो जैसे बंग्लादेश के लिए विश्वकप जीतने जैसी बात होगी|फिर भी भारत की भोली जनता की उम्मीद देखिए अपने निजी खुशियों को नया-पुराना करने में व्यस्त है |सार्वजनिक खुशी या कोई देशव्यापी समाचार की ओर वो भी ध्यान नही देते है क्योंकि उन्हें भी पता है कि अब डीजल और पेट्रोल के दाम तो घटेंगे नही और ना ही देश में भूख और ठंड से मरने वालों की संख्या में घटोत्तरी होगी|


नये के नाम पर अगर पिछले वर्ष की बात करें तो कॉमनवेल्थ गेम जैसी सफलता मिली जो निश्चित रूप से हम भारतीयों के लिए गर्व की बात है पर उसके साथ ही कॉमनवेल्थ घोटाला भारतीयों के सर को नीचा कर दिया और कोई उम्मीद भी नही दिखाई देती की इस बात का फ़ैसला कब तक होगा|


सुरेश कलमाड़ी,ललित मोदी जैसे महान विभूतियों ने तो यह भी सिद्ध कर दिया की खेल-खेल में भी घोटाले संभव है और वो भी हल्के-फुल्के नही बल्कि काफ़ी भारी भरकम| जब जब २०१० की बात होगी इन लोगों का नाम सबसे उपर होगा|भारत के पूर्व रेकॉर्ड को देख कर इससे इनकार नही किया जा सकता कि नये वर्ष में कुछ और नये कलाकार सामने निकल कर आए जो घोटालेबाजी के करतब में जनता को और भी आश्चर्यचकित कर दें और देश की हालत यथास्थिति बनी रहें |और नया जैसा कुछ प्रतीत ही ना हो|

अब यदि पब्लिक प्याज के दाम में कमी को नया मानती है तो फिर नये वर्ष में नया ज़रूर होगा वरना राष्ट्रीय स्तर पर तो पुरानी टाइप की घटना ही बार बार घटती रहती है

9 comments:

राज भाटिय़ा said...

लोहड़ी, मकर संक्रान्ति पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई

Kajal Kumar said...

अच्छा आकलन किया है आपने

Kailash C Sharma said...

कुछ समय बाद यह सब नया भी पुराना लगने लगेगा..

राज भाटिय़ा said...

अरे सुबह सुबह किन कमीनो की याद दिला दी... अब जब याद दिलाई हे तो सब का नाम लिख देते वाई का नाम तो भुल ही गये:)
जनाब कुछ नही बदला, अगर बदला हे तो गरीब का खाना बदला हे, पहले दाल छीनी, फ़िर प्याज छीना, अब रोटी की बारी हे

डॉ. मनोज मिश्र said...

मकर संक्रान्ति पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई.

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बिल्कुल सटीक विश्लेषण ..... जाने कुछ बदलेगा ....

हरकीरत ' हीर' said...

विनोद जी अगर ख्वाब न बुने जायें तो भी जीना मुश्किल है .....
इंसान इन्हीं ख्वाबों के सहारे ही तो जी लेता है .....
पूरे हों या न हों .....!!

Patali-The-Village said...

बिल्कुल सटीक विश्लेषण| शुभकामनाएं और बधाई|

दिगम्बर नासवा said...

हम भारतीय हर क्षेत्र में कमाल करते हैं ... तो फिर भ्रष्टाचार की क्या बात है ....