Friday, November 19, 2010

चमचों का जलवा---(विनोद कुमार पांडेय)

सरकारी ऑफीस से लेकर प्राइवेट स्कूल तक सब जगह चमचे भरे पड़े है.जो पब्लिक और ऑफीसर के बीच रह कर काम करते अधिकारी वर्ग उनकी ही बात सुनते है और आम जनता चमचों की मध्यस्थता से परेशान हो जाती है..उसी सन्दर्भ में एक व्यंग ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ....आशीर्वाद दीजिएगा.


जगह-जगह सरकारी चमचे
पब्लिक की लाचारी चमचे

मंत्री जी को भी पसंद है
पढ़े-लिखे अधिकारी चमचे

शहद घुली सी मीठी बोली
लगते हैं मनुहारी चमचे

सब होगा बस रुपया दो
इतने तो हितकारी चमचे

थाना हो या कोर्ट-कचहरी
अफ़सर पर भी भारी चमचे

जनता को ठगने की डेली
करते हैं तैयारी चमचे

आम आदमी बंदर जैसा
डमरू लिए मदारी चमचे

दुनिया चमचों का मेला है
मिलते बारी बारी चमचे

23 comments:

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बेहतरीन व्यब्ग्य और लाजवाब ग़ज़ल !

केवल राम said...

दुनिया चमचों का मेला है
मिलते बारी बारी चमचे
हर एक शेर में नया ख्याल है .....वह क्या बात है ...बेहतरीन गजल ..शुभकामनायें

दीप्ति शर्मा said...

umda rachna

blog mai aane ko aabhar
kripaya yuhi margdarsan karte rahe

M VERMA said...

दुनिया चमचों का मेला है
मिलते बारी बारी चमचे

बेहतरीन .. बहुत सुन्दर
आपस में मिल बाँट कर खाते
कदम कदम पे सरकारी चमचे

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बेहतरीन कटाक्ष.... सच हर जगह भरे पड़े हैं चमचे ....

मनोज कुमार said...

विनोद भाई ... आपके इस जलवे के केन्द्र में असाधारण आदमी है और उसके चारो ओर चमचे घूमते हैं। आजकल चमचों की सभ्यता और संस्कृति की नींव बहुत मज़बूत है! जिसके कारण साधारण आदमी का आशियाना सिमटता-सिकुड़ता जा रहा है। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
फ़ुरसत में .... सामा-चकेवा
विचार-शिक्षा

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आम आदमी बंदर जैसा
डमरू लिए मदारी चमचे

ज़बरदस्त चमचा प्रकरण

ZEAL said...

.

थाना हो या कोर्ट-कचहरी
अफ़सर पर भी भारी चमचे..

bahut sateek vyaakhya hai chachon ki

.

दिगम्बर नासवा said...

मंत्री जी को भी पसंद है
पढ़े-लिखे अधिकारी चमचे

आम बोलचाल की भाषा में लाजवाब व्यंग बना दिया है आपने .... बहुत ही खूबसूरत और तेज़ धार है विनोद जी आपकी .... अब आप मास्टर नहीं पी एह दी होते जा रहे अहिं व्यंग लिखने में ... और अलग अलग माध्यम से ...

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

achchhi vyangy rachna.metre bhi bahut badhiya .
chamchon ki chandi to hai hi!

सतीश सक्सेना said...

बड़े अफसरों के दरवाजे
हरदम ठाठ बढ़ाते चमचे
दो घंटे से हम लाइन में,
मंद मंद मुस्काते चमचे!

अरुण चन्द्र रॉय said...

बढ़िया व्यंग्य.. बहुत धार है आपमें..

kshama said...

Aah! Afsos! Sach hai...har taraf,har jagah chamche hee chamche hain!

kumar zahid said...

जगह-जगह सरकारी चमचे
पब्लिक की लाचारी चमचे
सब होगा बस रुपया दो
इतने तो हितकारी चमचे
थाना हो या कोर्ट-कचहरी
अफ़सर पर भी भारी चमचे
आम आदमी बंदर जैसा
डमरू लिए मदारी चमचे


वाह वाह भाई विनोद जी ,
टिप्पणी ये है कि ..

नपा तुला लेखन है भाई
सच है जीवन दर्शन भाई

ढेर हो गईं लिखीं किताबें
सच्चा आंखन देखन भाई

पूरी ग़ज़ल बढ़िया है ...

अनुपमा पाठक said...

बढ़िया व्यंग्य!

डॉ. नूतन - नीति said...

मंत्री जी को भी पसंद है
पढ़े-लिखे अधिकारी चमचे
bahut khoob likha hai..chamcho kaa itna sundar gungaan vyakhyaan nahi mila padhne ko... bahut achhi rachna..

शरद कोकास said...

व्यंग्य गज़ल को उर्दू में हज़ल कहते हैं । यह उस श्रेणि की उम्दा रचना है ।

देवेन्द्र पाण्डेय said...

इन चमचों में एक गुण और होता है,,,,
एक कप के टूटते ही दूसरे कप के हो जाते हैं।
...आजकल बहुत खूब लिख रहे हो भाई।

monali said...

Hahaha...
Afsar chamcha dou khade, kaake lagu paon..balihaari va chamche ko jo afsar tak pahunchaye... mazedar rachna

अविनाश वाचस्पति said...

चमचों को खूब मारा है तमाचा

शनिवार को गोवा में ब्‍लॉगर मिलन और रविवार को रोहतक में इंटरनेशनल ब्‍लॉगर सम्‍मेलन

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना मंगलवार 23 -11-2010
को ली गयी है ...
कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..


http://charchamanch.blogspot.com/

विरेन्द्र सिंह चौहान said...

Are Bahut achhi vayang rachna likhi hai aapne Vinod ji. Aabhaar.

निर्मला कपिला said...

बेहतरीन चमचे हर एक शेर दाद के काबिल। बधाई।