Thursday, November 25, 2010

एक और व्यंग्य ग़ज़ल----(विनोद कुमार पांडेय)

व्यंग्य ग़ज़लों का सिलसिला जारी रखते हुए अपने सीधे-सादे लहजे में प्रस्तुत करता हूँ एक और ग़ज़ल|आप सब के आशीर्वाद का आपेक्षी हूँ.


चारो ओर मचा है शोर
सब अपनें-अपनों में भोर

बच कर के रहना रे भाई
बना आदमी आदमख़ोर

इंसानों ने सिद्ध कर दिए
रिश्तों की नाज़ुक है डोर

नज़र उठा कर देखो तो
है ग़रीब,सबसे कमजोर

अजब-गजब के लोग यहाँ
बाप सिपाही,बेटा चोर

जिसको कोई कमी नही हैं
उसका भी दिल माँगे मोर

17 comments:

kshama said...

बच कर के रहना रे भाई
बना आदमी आदमख़ोर
Kya baat kah dee!

केवल राम said...

नज़र उठा कर देखो तो
है ग़रीब,सबसे कमजोर
पूरी गजल के हर एक शेर बहुत गहरे अर्थ को संप्रेषित करते है.....सुंदर
चलते -चलते पर आपका स्वागत है

Sunil Kumar said...

इंसानों ने सिद्ध कर दिए
रिश्तों की नाज़ुक है डोर
सच्चाई को वयां करती रचना , बधाई

सतीश सक्सेना said...

शाबाश विनोद ....परिपक्व रचना !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सशक्त व्यंग रचना ..दिल मांगे मोर

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

जिसको कोई कमी नही हैं
उसका भी दिल माँगे मोर
सभी पंक्तियाँ कमाल हैं.... पर इन दो लाइनों ने सब कुछ ही कह दिया....
सुंदर अभिव्यक्ति

नीरज जाट जी said...

बहुत अच्छे विनोद जी, बहुत अच्छे।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

अजब-गजब के लोग यहाँ
बाप सिपाही,बेटा चोर

जिसको कोई कमी नही हैं
उसका भी दिल माँगे मोर

क्या बात है ... बहुत ही बढ़िया ... मज़ा आ गया !

Vijay Kumar Sappatti said...

bahut sundar rachna . padhkar bahut accha lga , aaj ke desh ki yahi sacchi tasweer hai

badhayi

vijay
kavitao ke man se ...
pls visit my blog - poemsofvijay.blogspot.com

दिगम्बर नासवा said...

इंसानों ने सिद्ध कर दिए
रिश्तों की नाज़ुक है डोर ..

कुछ कुछ व्यंग ... कुछ कुछ सीधा इंसान ... बहुत कुछ चुप है विनोद जी आपके अन्दर .... लाजवाब ग़ज़ल है ...

दिगम्बर नासवा said...

इंसानों ने सिद्ध कर दिए
रिश्तों की नाज़ुक है डोर ..

कुछ कुछ व्यंग ... कुछ कुछ सीधा इंसान ... बहुत कुछ Chupa है विनोद जी आपके अन्दर .... लाजवाब ग़ज़ल है ...

डॉ टी एस दराल said...

जिसको कोई कमी नही हैं
उसका भी दिल माँगे मोर

वाह , क्या बात कही है ।
बढ़िया व्यंग ।

ZEAL said...

.

इंसानों ने सिद्ध कर दिए
रिश्तों की नाज़ुक है डोर...

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हकीकत बयान करती उम्दा ग़ज़ल ।

.

हरकीरत ' हीर' said...

छोटी बहर में सीधे-सादे लहजे में अच्छी ग़ज़ल बनी है विनोद जी....!!

शरद कोकास said...

बाप सिपाही बेटा चोर का जवाब नही ।

विरेन्द्र सिंह चौहान said...

अजब-गजब के लोग यहाँ
बाप सिपाही,बेटा चोर

जिसको कोई कमी नही हैं
उसका भी दिल माँगे मोर



ये चार पंक्तियाँ तो गज़ब है ...विनोद जी. बहुत ही बढ़िया.

देवेन्द्र पाण्डेय said...

जिसको कोई कमी नही हैं
उसका भी दिल माँगे मोर
...बहत अच्छा प्रयोग, चोर-सिपाही का भी।