भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए अन्ना हज़ारे जी के पहल और नेतृत्व को सलाम करते हुए देश की ताज़ा परिस्थितियों पर एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ |आप भी गुनगुनाएँ जिससे मेरी लेखनी सफल हो जाएँ| धन्यवाद||
भ्रष्ट नेताओं के चेहरे की चमक गायब हुई,
पड़ गई है देश की सरकार पेशोपेश में |
देख कर के देश के परिवेश को यूँ लग रहा,
कुछ नया बदलाव हो कर ही रहेगा देश में ||
जिस पे हमने की भरोसा,वो ही धोखेबाज थे
कीमतें बढ़ती रही जब-जब भी उनके राज थे
आम जनता को बनाया है गया उल्लू सदा
बोलकर कुछ शब्द मीठे छल भरे संदेश में || देख कर के.....
मिल गई चोरो को कुर्सी और जनता त्रस्त है
कुछ गये पकड़े मगर,कुछ अब भी बाहर मस्त है
कानिमोझी और राजा ने उड़ाए माल अरबों
खाक होगी कुछ तरक्की,इस बुरे परिवेश में || देख कर के.....
दैत्य भ्रष्टाचार का कुछ इस तरह पीछे पड़ा
लूटते खाते रहें सब जिसके जो हत्थे पड़ा
तब करप्सन को मिटाने का लिए संकल्प मन में
आ गये बापू दोबारा अन्ना जी के वेश में || देख कर के.....
टीम अन्ना नें उड़ा दी नींद इस सरकार की
सोनिया,राहुल हुए फुर्र, फँस गये सरदार जी
कपिल सिब्बल हैं लगे अपने सियासी दाँव में
दिग्विजय पगला के कुछ भी बक रहें आवेश में || देख कर के.....